नमस्कार आपका स्वागत है

नमस्कार  आपका स्वागत है
नमस्कार आपका स्वागत है

Thursday, November 10, 2011

संगीत में मध्यम स्वर का महत्व ..!!

भारतीय संगीत के सात स्वरों में से मध्यम स्वर बड़े महत्व का है |इस स्वर के प्रयोग से हमें यह मालूम पड़ता है कि अमुक राग का गायन समय दिन है या रात्री |संगीत के शास्त्रकारों ने चौबीस घंटों के समय को दो बराबर भागों में विभाजित किया है |प्रथम भाग को पूर्वार्ध कहा  ,जिसका  गायन समय रात्री के बारह बजे से दिन के बारह बजे माना अर्थात A.M में |दूसरे भाग को उत्तरार्ध कहा जिसका गायन समय दिन  के बारह बजे से रात्री  के बारह बजे तक माना अर्थात P.M में |
दिन के पहले भाग में शुद्ध म की और दूसरे भाग में तीव्र म की प्रधानता मानी गयी है |


उदाहरण:1-भैरव व बहार लीजिये |इन दोनों रागों में शुद्ध मध्यम का प्रयोग होता है तो ये अनुमान लगाया जा सकता है किये राग  दिन के पूर्वार्ध में  ,अर्थात रात्री के बारह बजे से दिन के बारह बजे तक गाये-बजाये जाते हैं |


2-यमन में तीव्र मध्यम का प्रयोग है इसलिए ये राग उत्तरार्ध में यानी रात के प्रथम प्रहर में गाया बजाया जाता है |


इस नियम के कुछ अपवाद भी हैं |तोड़ी ,हिंडोल,भीमपलासी दुर्गा,देश,बागेश्वरी आदि इस नियम का खंडन करते हैं |
इस नियम का पालन संधिप्रकाश रागों में निश्चित रूप से होता है


संधिप्रकाश राग क्या है इसकी चर्च अगली पोस्ट   में करेंगे ....                     


                                                                                                क्रमशः ...

12 comments:

  1. मानव जीवन में ही मध्यम का महत्व बहुत अधिक है।

    ReplyDelete
  2. मैम बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने।

    सादर

    ReplyDelete
  3. बढ़िया कक्षा... पूर्वार्ध और उत्तरार्ध का समय सामान होने की वजह से भ्रमित कर रहा है.... दोनों में ही समय रात्रि के १२ बजे से दिन के १२ बजे.... टंकण त्रुटि है या...???

    सादर आभार...

    ReplyDelete
  4. संजय जी आभार आपका त्रुटी इंगित करने के लिए ....उसे सुधार दिया गया है....

    ReplyDelete
  5. अब जाके स्पष्ट हुआ। अब तक सुनता था, इस राग में शुद्ध और इस में तीव्र का प्रयोग हुआ है, यह प्रथम पहर में गाए जाने वाला राग है। आदि आदि।
    आपकी क्लास में आकर बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

    ReplyDelete
  6. आप हम सुरहीनों को सुर का पाठ पढा रहीं हैं
    बहुत पुनः का कार्य कर रहीं हैं.स्वरोज सुर मंदिर में आकर
    मन प्रसन्न हो गया है.

    प्रभु आपको सदा ही खुश रखे,यही प्रार्थना है जी.

    ReplyDelete
  7. शास्त्रीय संगीत की जानकारी देता महत्वपूर्ण ब्लॉग।

    ReplyDelete
  8. आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । । मेरे पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  9. कल 18/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  10. मध्यम स्वर के संबंध में सुंदर जानकारी।
    शुभकामनाएं।

    ReplyDelete