भारतीय संगीत के सात स्वरों में से मध्यम स्वर बड़े महत्व का है |इस स्वर के प्रयोग से हमें यह मालूम पड़ता है कि अमुक राग का गायन समय दिन है या रात्री |संगीत के शास्त्रकारों ने चौबीस घंटों के समय को दो बराबर भागों में विभाजित किया है |प्रथम भाग को पूर्वार्ध कहा ,जिसका गायन समय रात्री के बारह बजे से दिन के बारह बजे माना अर्थात A.M में |दूसरे भाग को उत्तरार्ध कहा जिसका गायन समय दिन के बारह बजे से रात्री के बारह बजे तक माना अर्थात P.M में |
दिन के पहले भाग में शुद्ध म की और दूसरे भाग में तीव्र म की प्रधानता मानी गयी है |
उदाहरण:1-भैरव व बहार लीजिये |इन दोनों रागों में शुद्ध मध्यम का प्रयोग होता है तो ये अनुमान लगाया जा सकता है किये राग दिन के पूर्वार्ध में ,अर्थात रात्री के बारह बजे से दिन के बारह बजे तक गाये-बजाये जाते हैं |
2-यमन में तीव्र मध्यम का प्रयोग है इसलिए ये राग उत्तरार्ध में यानी रात के प्रथम प्रहर में गाया बजाया जाता है |
इस नियम के कुछ अपवाद भी हैं |तोड़ी ,हिंडोल,भीमपलासी दुर्गा,देश,बागेश्वरी आदि इस नियम का खंडन करते हैं |
इस नियम का पालन संधिप्रकाश रागों में निश्चित रूप से होता है
संधिप्रकाश राग क्या है इसकी चर्च अगली पोस्ट में करेंगे ....
क्रमशः ...
दिन के पहले भाग में शुद्ध म की और दूसरे भाग में तीव्र म की प्रधानता मानी गयी है |
उदाहरण:1-भैरव व बहार लीजिये |इन दोनों रागों में शुद्ध मध्यम का प्रयोग होता है तो ये अनुमान लगाया जा सकता है किये राग दिन के पूर्वार्ध में ,अर्थात रात्री के बारह बजे से दिन के बारह बजे तक गाये-बजाये जाते हैं |
2-यमन में तीव्र मध्यम का प्रयोग है इसलिए ये राग उत्तरार्ध में यानी रात के प्रथम प्रहर में गाया बजाया जाता है |
इस नियम के कुछ अपवाद भी हैं |तोड़ी ,हिंडोल,भीमपलासी दुर्गा,देश,बागेश्वरी आदि इस नियम का खंडन करते हैं |
इस नियम का पालन संधिप्रकाश रागों में निश्चित रूप से होता है
संधिप्रकाश राग क्या है इसकी चर्च अगली पोस्ट में करेंगे ....
क्रमशः ...
