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Wednesday, May 16, 2012

संगीत की शक्ति ........(२)


भारतीय संगीत साहित्य में तानसेन से सम्बंधित कई चमत्कारिक किम्वदंतियां हैं ,जिनमे से दीपक राग द्वारा दीपक जला देना ,मेघ द्वारा वृष्टि कराना और स्वर के प्रभाव से हिरन आदि पशुओं को पास बुला लेना मुख्या रूप से प्रचलित है |इसी प्रकार ग्रीक साहित्य में  ऑरफेंस का वर्णन मिलता है ,जो संगीत के प्रभाव से चराचर जगत को हिला देता था ,समुद्र की उत्ताल तरंगों को शांत कर देता था और वायु के वेग को रोक सकता था |
                             मिल्टन ने 'पैराडाईज़ लॉस्ट ' में लिखा है कि जब ईश्वर ने सृष्टि रची,तब उसने पहले संगीत कि शक्ति से बिखरे हुए नकारात्मक तत्वों को एकत्रित किया ,तत्पश्चात सृष्टी की रचना की |ट्राइडन इसी बात को अपने सेंट असीलिया कि प्रार्थना के गीत में दिखता है |वह कहता है कि संगीत में केवल वास्तु के सृजन कि ही नहीं,लय उत्पन्न करने की भी शक्ति है ;जिस प्रकार जगत कि उत्पत्ति संगीत से है ,उसी प्रकार उसका लय भी संगीत  से ही होता है |जैसे संगीत भौतिक तत्वों का समन्वय करता है ,वैसे ही अध्यात्मक तत्वों का भी |स्थूल और सूक्ष्म दोनों ही सृष्टि संगीत कि शक्ति के अधीन हैं ,इस सत्य को स्टीवेंसन ने भी स्वीकार किया है |उन्होंने अपने एक लेख में बंसी बजाते हुए प्रकृति-देव की कल्पना की है |

शास्त्र के साथ कुछ क्रियात्मक हो तो अपनी बात कि सार्थकता सिद्ध होती है खास तौर पर तब जब संगीत की शक्ति  की बात हो ...!
राग पूरिया कल्याण सुनिए .....
मरवा थाट का राग है ...

9 comments:

  1. संगीत हमारा ही हिस्सा है, जो हमें हमारा स्वरूप याद दिलाता रहता है।

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  2. बहुत सही कहा है ...

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  3. सुन संगीत संग मन डोला।
    सादर।

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  4. दो ही चीजें प्रकृति के सबसे करीब हैं-नृत्य और संगीत।

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  5. वाह...बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति...

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  6. बहुत सुंदर पोस्ट .....

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  7. बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  8. bahut hi jaankari ukt v sshkt prastuti karan-----
    poonam

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