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Thursday, December 6, 2012

छाई हेमंत की बहार .....


छाई हेमंत की बहार .....

 खिल गईं ....
धरा पर  कलियाँ हज़ार ....
अम्बर से ओस झरे ...
धरा हृदय प्रीत भरे ...
ओस सी फूल पर प्रीत पगे ...
पोर-पोर    भीगे ......!!



.डाल-डाल  ....
पात पात ...
प्रीत बोले .....
हिंडोली  मन  हिंडोला झूले .......
जिया  ले हिचकोले .....
हिया  में छब पिया की ...
चितवन  में  सपन  डोले ......
री सखी .....
पपीहा पिउ-पिउ बोले ....!!!!
हेमंत की चले मंद बयार.....
''हिंडोली '' हौले हौले अवगुंठन खोले .....
आज धरा का  तन-मन  डोले ....!!!!!!!!


***********************

* ''हिंडोली '' राग -भिन्न षडज  का ही दूसरा नाम है ,जो हेमंत ऋतु  में गया जाने वाला राग है ।आइये सुश्री अश्विनी देशपांडे जी से राग भिन्न षडज सुने ...जो इसी ऋतु  का राग है ....



14 comments:


  1. डाल-डाल ...
    पात पात ...
    प्रीत बोले ...
    हिंडोली मन हिंडोला झूले ... ...
    जिया ले हिचकोले ... ...
    हिया में छब पिया की ...
    चितवन में सपन डोले ... ...
    री सखी ... ...
    पपीहा पिउ-पिउ बोले ....!!!!
    हेमंत की चले मंद बयार... ...
    'हिंडोली' हौले हौले अवगुंठन खोले ... ...
    आज धरा का तन-मन डोले ... ...

    बेहतरीन !
    कमाल की रचना !
    वाऽह ! क्या बात है !

    आदरणीया अनुपमा दी
    आपकी क्लासिक रचनाएं लाजवाब होती हैं …
    हमेशा …
    खूबसूरत और सार्थक रचना !

    …आपकी लेखनी से सुंदर रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे… और हम इनका रसास्वादन करते रहें… यही कामना है …
    शुभकामनाओं सहित…

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  2. …और सुश्री अश्विनी देशपांडे जी द्वारा प्रस्तुत
    भिन्न षडज की यह प्रस्तुति बरसन लागी… सुनते हुए स्वयं को स्वर्ग में ही महसूस कर रहा हूं …

    परम आदरणीया विदुषी किशोरी अमोणकर जी की भिन्न षड़ज की बंदिश उड़जा रे कागा की याद आ रही है
    संग्रह में से ढूंढ़ कर सुनना पडेगा …

    आभार आपका हृदय से …
    मंगलकामनाओं सहित …

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  3. सुन्दर रचना....
    गीत अभी सुनती हूँ :-)

    सादर
    अनु

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  4. सुबह सुबह इतना उत्कृष्ट सुर श्रवण कराने का आभार..

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  5. जब भी आप के ब्लॉग की तरफ आना होता है तो महसूस होता है मानो माँ सरस्वती के मंदिर की चौखट का स्पर्श कर लिया .......आगे शब्द नहीं हैं मेरे पास .

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    1. हृदय से आभार पंडित जी .....

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  6. anupama ji pahli bar aapka blog dekha hai sangeet ke madhurya me racha paga . bada achchha laga . kabhi madhuvanti aur jog ki sargam deejiye .

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    Replies
    1. बहुत आभार गिरिजा जी ...!!अगली पोस्ट मेन ही देती हूँ ....

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  7. अच्छा है। गीत और गायन- दोनों।

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  8. बहुत ही सुन्दर कर्णप्रिय रचना । शुभकामनाएँ ।

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  9. बहुत सुंदर रचना।।।

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  10. सुन्दर ...अति सुन्दर ...:)

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

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