सगीत और कविता एक ही नदी की दो धाराएँ हैं ...इनका स्रोत एक ही है किन्तु प्रवाह भिन्न हो जाते हैं ...इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने ये नया ब्लॉग शुरू किया है ताकि दोनों को अपना समय दे सकूं ...!!आशा है आपका सहयोग मिलेगा.......!!
नमस्कार आपका स्वागत है
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Wednesday, February 10, 2016
Friday, September 25, 2015
Friday, July 24, 2015
Sunday, May 24, 2015
Thursday, March 26, 2015
Saturday, February 28, 2015
Tuesday, November 11, 2014
सुनता है गुरु ज्ञानी ....
अनायास उदास है मन !!एक प्रश्न घूम रहा है मन मे .....!!
जी रहा किस हेतु जीवन ....जोड़ मन का सेतु रेमन ........!!
अविरल अश्रुधार बस रुकी हुई बहने को अँखियों के कोरों पर !!तोड़ सारे बांध ,बहने को .....आकुल .........कुछ कहने को व्याकुल ......
फिर भी आज मौन चुनता है ये मन !!
बस आँख बंद और बहता जाता है कुमार जी की आवाज़ के साथ ......
एक अजीब सी विश्रांति पाता है ..........जाने किस लोक का भ्रमण है ये ....
जी रहा किस हेतु जीवन ....जोड़ मन का सेतु रेमन ........!!
अविरल अश्रुधार बस रुकी हुई बहने को अँखियों के कोरों पर !!तोड़ सारे बांध ,बहने को .....आकुल .........कुछ कहने को व्याकुल ......
फिर भी आज मौन चुनता है ये मन !!
बस आँख बंद और बहता जाता है कुमार जी की आवाज़ के साथ ......
एक अजीब सी विश्रांति पाता है ..........जाने किस लोक का भ्रमण है ये ....
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