सगीत और कविता एक ही नदी की दो धाराएँ हैं ...इनका स्रोत एक ही है किन्तु प्रवाह भिन्न हो जाते हैं ...इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने ये नया ब्लॉग शुरू किया है ताकि दोनों को अपना समय दे सकूं ...!!आशा है आपका सहयोग मिलेगा.......!!
नमस्कार आपका स्वागत है
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Tuesday, July 4, 2017
Thursday, March 30, 2017
Thursday, September 22, 2016
Tuesday, November 11, 2014
सुनता है गुरु ज्ञानी ....
अनायास उदास है मन !!एक प्रश्न घूम रहा है मन मे .....!!
जी रहा किस हेतु जीवन ....जोड़ मन का सेतु रेमन ........!!
अविरल अश्रुधार बस रुकी हुई बहने को अँखियों के कोरों पर !!तोड़ सारे बांध ,बहने को .....आकुल .........कुछ कहने को व्याकुल ......
फिर भी आज मौन चुनता है ये मन !!
बस आँख बंद और बहता जाता है कुमार जी की आवाज़ के साथ ......
एक अजीब सी विश्रांति पाता है ..........जाने किस लोक का भ्रमण है ये ....
जी रहा किस हेतु जीवन ....जोड़ मन का सेतु रेमन ........!!
अविरल अश्रुधार बस रुकी हुई बहने को अँखियों के कोरों पर !!तोड़ सारे बांध ,बहने को .....आकुल .........कुछ कहने को व्याकुल ......
फिर भी आज मौन चुनता है ये मन !!
बस आँख बंद और बहता जाता है कुमार जी की आवाज़ के साथ ......
एक अजीब सी विश्रांति पाता है ..........जाने किस लोक का भ्रमण है ये ....
Tuesday, July 1, 2014
Tuesday, August 6, 2013
मेरा पीर घर आया .....राग मियां मल्हार .....!!!!
बरसते हुए पानी में पीड़ा क्यों झरने लगती है ......
ठंडी पावन पवन आर्द्रता से भरी ..एक अजीब सी टीस लिए हुए जब बहती है ....छू जाती है हृदय को .......तब नैनो से दो बूंद आँसू ज़रूर टपकते हैं और उस समय कहना बहुत मुश्किल है ....मन क्या कह रहा है ये समझना भी बहुत मुश्किल है ....
मनन चिंतन से बस ईश्वर के पास होने की अनुभूति होती है .....
ये तड़प कैसी है .....
आह्लाद है या विरह .....
...राग मल्हार पर एक खूबसूरत प्रस्तुति
Friday, July 19, 2013
आज रात चाँद को पुकारती रही................
आज रात चाँद को पुकारती रही
व्योम मंच पर न किन्तु चाँद आ सका
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव प्यार कर ...
तारकों से आरती उतरती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....
*****************************************************
शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़ में.......
कृपया ईयर फोन से सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव प्यार कर ...
तारकों से आरती उतरती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....
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शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़ में.......
कृपया ईयर फोन से सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....
Monday, June 17, 2013
बरसन लागी ....
मस्तिष्क से सम्बंधित प्राकृतिक ज्ञान और उसकी क्रिया प्रणाली तथा अनुभुति ,मनोविज्ञान के अंतर्गत आती है |संगीत से सम्बन्ध होने पर उसे संगीत का मनोविज्ञान कहा जाता है |मनोविज्ञान का कार्य शारीरिक उत्तेजना और चेतना के प्रवाह के सम्बन्ध को स्थापित करना है |कोई भी नाद हमारी करणेंद्रिय को किस प्रकार प्रभावित करता है ,यह सब संगीत के मनोविज्ञान की श्रेणी में आता है । कुछ ध्वनियाँ ऎसी हैं जो ह्रदय पर अपनी छाप छोड़ती ही हैं ।
रिमझिम फुहार पड़ने लगती है और मन ...बस मन भी भीगने लगता है ....भीगे से स्वर ...टिप टिप बारिश की आवाज़ और .......चुप रह कर भी क्या चुप रहा जाता है ....भीगी भीगी हवा बोल उठती है ....
कैसी बरसात है
बहती है थमी रहती है ....
आँख का पानी है या ..
मन के समुन्दर की बस एक बूँद ....!!!!!!
बरसन लगी सावन बुंदियाँ राजा ...
एक आह्लाद .....अमन ...एक सुकून ....कुछ चैन देता है संगीत ......!!इतना सुमधुर गीत सुन कर कौन होगा जो रस में न डूबे ...
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