आज रात चाँद को पुकारती रही
व्योम मंच पर न किन्तु चाँद आ सका
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव प्यार कर ...
तारकों से आरती उतरती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....
*****************************************************
शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़ में.......
कृपया ईयर फोन से सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव प्यार कर ...
तारकों से आरती उतरती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ...
हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....
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शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़ में.......
कृपया ईयर फोन से सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....

