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Friday, July 19, 2013

आज रात चाँद को पुकारती रही................

आज रात चाँद को पुकारती रही
व्योम मंच पर न किन्तु चाँद आ सका
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद  को पुकारती रही ...

देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव  प्यार कर ...
तारकों से आरती उतरती रही ...

आज रात चाँद को पुकारती रही ...

हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....

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शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़  में.......
कृपया ईयर फोन से  सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....

Friday, May 11, 2012

धीरे धीरे मचल ...


कभी जब अपनी पहचान ढूंढती हूँ .....एक ही आवाज़ आती है ....
मेरी आवाज़ ही पहचान है .....गर याद रहे ......!!स्वर आत्मा के साथी हैं ..!कभी साथ नहीं छोड़ते |कोई भी कला हो उसे आत्मा आत्मसात करती है |तभी कहते हैं मनुष्य कुछ मूलभूत चीज़ों के साथ जन्मता है |
        विभिन्न देशों में संगीत के प्रकार चाहे भिन्न भिन्न हों ,परन्तु प्रचार और गुणों का रूपांतर नहीं होता |संगीत का मौलिक रूप और उसके सृजनात्मक तत्त्व सभी स्थानों के संगीत में समान होते हैं |संगीत के परमाणुओं में मानव की वृत्तियों को प्रशस्त करने के साथ-साथ आत्मिक शक्ति भी निहित है |चारित्रिक उत्थान का  सर्वोत्तम साधन भी संगीत ही है |इस ललित कला  की गहराई मापी नहीं जा सकती |


ये तो हुईं कुछ शास्त्र की बातें ....अब ....
हमारी फिल्मों में भी कुछ ऐसे नायब नगमे हैं जिनको सुन कर झूम उठता है मन ....!

 आप सभी को , अनुपमा फिल्म का ....आज मैं अपना पसंदीदा गीत सुनाना चाहती हूँ ....
  ...धीरे धीरे मचल ...





Thursday, March 22, 2012

पुरी में आनंद भयो .

साधना जी कहरवा भजनी ठेका पर ये भजन प्रस्तुत है ...!!
शुभ समय भी है ....कल से नवरात्र प्रारंभ है ...नव संवत्सर आप सभी को मंगलमय हो ....!!

घर आ गए लक्ष्मण राम
पुरी में आनंद भयो .

सुरा गऊअन के गुबर मंगाए ,
डिगधर अंगन लिपाये ,
गज मुतियन के चौक पुराए
कंचन कलश लिसाए
पुरी में आनंद भयो ....

मात कौशल्या पूछन  लागीं
कहो बन की कछु बात
कितने दिन में रावन मारे
दियो विभीषण राज
पुरी में आनंद भयो ...

आठ घाट के रावन मारे
मेघनाद बलवान
कुम्भकरण से जोधा मारे ...
राज्य विभीषण पाए
पुरी में आनंद भयो ....

मात कौशल्या करें आरती
सखियाँ मंगल गाएँ
घर-घर बाजे अनंद बधैया
तुलसीदास गुण गायें ....
पुरी में अनंद भयो ....



Tuesday, March 20, 2012

आज फिर जीने की तमन्ना है ....!!

आज आपको अपना गाया  हुआ एक गीत सुनाने का मन है ..!गीत ज़रूर सुनिए ...पर उससे पहले कुछ संगीत शास्र भी ....

रस-परिपाक में राग और वाणी के अतिरिक्त लय भी एक प्रमुख तत्व  है ।भाव के अनुकूल शब्दों की प्रकृति जान कर उचित लय का प्रयोग संगीत के सौंदर्य वर्द्धन   में होता है ।ठीक उसी प्रकार ,जैसे करुना की अभिव्यंजना के समय मनुष्य की क्रीडाओं में ठहराव आ जाता है और चपलता नष्ट हो जाती है ,परन्तु उत्साह और क्रोध के अवसर पर उसकी क्रियाओं में तीव्रता आ जाती है ।इसीलिए करुण रस के परिपाक के लिए विलंबित लय हास्य और श्रृंगार के लिए मध्य लय ,तथा वीर,रौद्र,अद्भुत एवं विभत्स रस  के  लिए द्रुत लय का प्रयोग प्रभावशाली सिद्ध होता है ।गीत की रसमयता ,छंद और ताल का सामंजस्य ,गायक-वादकों की परस्पर अनुकूलता तथा स्वर और लय की रसानुवर्तिता इत्यादि विशेषताएं मिलकर संगीत में सौंदर्य बोध  का कारण बनती हैं ।
  




Tuesday, January 31, 2012

दमादम मस्त कलंदर .....

मैं सोचती हूँ ...शास्त्रीय संगीत मेरी आत्मा है ...!लेकिन मुझ जैसे और भी लोग हैं जिनकी आत्मा है शास्त्रीय संगीत ...!!शायद मुझसे भी ज्यादा लगाव है संगीत से उनका ...!!
गाना बजाना और सुनना ...
किन्तु  न गायक न वादक न श्रोता ...यहाँ सिर्फ संगीत है .....एक रूप ...उसी में सब समां जाना चाहते हैं ...संगीत सब को एक लहर में बहा ले जाता है ....इस अनुभूति के लिए .. ...इस शाम के लिए मैं अपने आप को धन्य मानती हूँ .....




सिंथ  पर  हैं  मुकेश कानन जी 
तबले पर हैं हमित वालिया जी . 

दमादम मस्त कलंदर .....सुनिए ....