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Friday, June 21, 2013

संगीत शास्त्र एवं गायन की जुगालबंदी है .....!!



भारतीय संगीत तो हमारी धरोहर है ही ,लेकिन एक संगीतकार की धरोहर है संगीत शास्त्र ,स्वर विज्ञानं,और संगीत प्रदर्शन |इन सबका महत्व जाने बिना संगीत के क्षेत्र में उन्नति करना कठिन है |इनमें से किसी एक का आभाव होने पर संगीत जीवन में एक अधूरापन बना रहता है जो हर संगीतकार को जीवन पर्यंत कचोटता रहता है ,भले ही वह किसी भी ऊंचाई पर क्यों न पहुच जाए |वस्तुतः यही टीस  ....यही प्यास हर संगीतकार को संगीत से जोड़े रखती है |हर संगीतकार अपना संगीत स्वयं अच्छे से पहचानता है |अपनी खामियां भी स्वयं जानता है |उन्हीं पर बार बार रियाज़ करते हुए स्वयं समझ आने लगता है कि हमारा संगीत अब उन्नति कर रहा है |यही एक छोटी सी बात है जो हर संगीतकार को खुशी देती है |
संगीतकार के लिए पुस्तकालय रखना नितांत आवश्यक है |अध्ययन करते समय वह अपना दृष्टिकोण संकीर्ण न बनाये |प्रत्येक पुस्तक का ,चाहे वो भारतीय लेखक की हो या विदेशी लेखक की ,मनन आवश्य करना चाहिए |अपने  दृष्टिकोण को उदार बनाते हुए आप जो अध्ययन करेंगे ,उससे आपका ज्ञान सर्वतोन्मुख होगा |आपके संगीत की पृष्ठभूमि उदार और गंभीर बनेगी |
संगीत का आदर्श है ,ज्ञान के सुनहले रत्नों को एकत्रित करके जाज्ज्वल्यमान प्रासाद का निर्माण करना तथा सार्वभौमिक मानव जीवन का एक्य व संगठन |संगीतज्ञों को ऎसी रचना का सृजन करना चाहिए ,जो प्रान्त व देश की सीमाओं की विभिन्नताओं में रहते हुए भी एक अव्यक्त सूत्र में मानव-हित तथा सहयोग के बिखरे हुए पल्लवों का बंदनवार कलामंदिर के चारों ओर बाँध सकने योग्य हो |इस आदर्श की पूर्ती तभी हो सकती है ,जब आप क्रियात्मक के साथ साथ शास्र का भी (theory) का भी अध्ययन करें |

इसी सबब से मैं आपको शास्त्र के बारे में भी जानकारी देती रहती हूँ कि आप संगीत के विभिन्न पहलुओं से वाबस्ता होते रहें |

आज आपको दो रागों की जुगालबंदी सुना रही हूँ ......एक अद्भुत अनुभव .....









आभार ... ......